Thursday, 25 July 2013

हंसती रहे तू हंसती रहे,
हया की लाली खिलती रहे
ज़ुल्फ के नीचे गर्दन पे
सुबह-ओ-शाम मिलती रहे

सोन्धी सी हंसी तेरी,
खिलती रहे मिलती रहे

पीली धूप पहन के तूम, देखो बाग में मत जाना
भन्वरे तुम को सब छेडेंगे, फूलों में मत जाना
मद्धम मद्धम हंस दे फिर से,
सोना सोना फिर से हंस दे

ताज़ा गिरे पत्ते कि तरह सब्ज लान पर लेटे हुए
साथ रंग हैं बहारों के, एक अदा में लपेटे हुए
सावन भादों सारे तुम से,
मौसम मौसम हंसते रहना
मद्धम मद्धम हंसते रहना

कभी नीले आस्मान पे चलो घूमनें चलें हम
कोइ अब्र मिल गया तो, ज़मीन पे बरस लें हम
तेरी बाली हिल गई है,
कभी शब चमक उठी हैं, कभी शाम खिल गयी है

तेरे बालों की पनाह में ये सियाह रात गुज़रे
तेरी काली काली आंखें कोई उजली बात उतरे
तेरी इक हंसी के बदले,
मेरी ये ज़मीन ले ले मेरा आस्मान ले ले

बर्फ गिरी हो वादी में, उन में लिपटी सिमती हुयी
बर्फ गिरी हो वादी में और हंसी तेरी गूंजी उन में
लिपटी सिमटी हुयी,
बात करे धुवाँ निकले
गरम गरम उजला धुवाँ,
नरम नरम उजला धुवाँ

- GULZAR

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