Wednesday, 24 July 2013

दोस्तों से झूठी मूठी दूसरों का नाम ले के,
फिर मेरी बातें करना,
यारा रात से दिन करना
लम्बी जुदायी तेरी बडा मुश्किल है
आहों से दिल भरना,
यारा रात से दिन करना
कब ये पूरी होगी दूर ये दूरी होगी,
रोज़ सफर करना,
यारा रात से दिन करना

चुपके से, चुपके से रात की चादर तले
चांद की भी आहट ना हो,
बादल के पीछे चले
जले कतरा कतरा,
गले कतरा कतरा,
रात भी ना हिले आधी आधी ये

फरवरी की सर्दियों की धूप में,
मूंदी मूंदी अंखियों से देखना हाथ की आड से, नीम्मी नीम्मी थंड और आग में
हौले हौले मारवा के राग में,
मीर की बात हो
दिन भी न डूबे रात ना आये,
शाम कभी न ढ़ले
शाम ढ़ले तो सुबह ना आये,
रात ही रात चले

तुझ बिना पगली ये पुरवई,
आके मेरी चुनरी में भर गयी
तु कभी ऐसे ही, आ गले लग जैसे ये पुरवई
साथिया, सुन तू, कल जो मुझु को नींद ना आये
पास बुला लेना
गोद में अपनी सर रख लेना, लोरी सुना देना

- GULZAR

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