मिलने वालों की तरह रोज़ मिला करें
कोई राब्ता ना सही, चलो आँखों में ही बसा करें
यूँ खामोश रहने का भी तो कोई सबब नहीं
और गर है तो मिल के खामोश हुआ करें
ये फासला जो मुझमे और तुझमे है
थोडा थोडा इसे ही मिटाया करें
माना मरासिम नहीं तो मिल के क्या करोगे
तो चलो, मिल के कुछ न किया करें
पर मिलने वालों कि तरह - रोज़ मिला करें
- रविशेखर मिश्रा

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