तेरे ज़लवे अब मुझे हर सू नज़र आने लगे
काश ये भी हो की मुझमे तू नज़र आने लगे
इब्तेदा ये थी के देखी थी ख़ुशी की एक झलक
इंतेहा ये है के ग़म हर सू नज़र आने लगे
बेक़रारी बढ़ते बढ़ते दिल की फ़ितरत बन गयी
शायद अब तस्कीन का पहलू नज़र आने लगे
ख़त्म कर दे ऐ सबा अब शाम-ए -ग़म की दास्ताँ
देख उन आँखों में भी आँसूं नज़र आने लगे
सू = तरफ
इब्तेदा = शुरुआत
तस्कीन = शान्ति
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