Tuesday, 3 February 2015



खामोशियाँ आवाज़ हैं, तुम सुनने तो आओ कभी 
छूकर तुम्हें खिल जाएंगी, ग़र  इनको बुलाओ कभी 
बेक़रार हैं बात करने को, कहने दो इनको ज़रा - 
खामोशियाँ - तेरी मेरी खामोशियाँ 
खामोशियाँ - लिपटी हुई खामोशियाँ 

क्या उस गली में कभी तेरा जाना हुआ 
जहां से ज़माने को गुज़रे हुए ज़माना हुआ 
मेरा समय तो वहीँ पे है ठहरा हुआ 
बताऊँ तुम्हें क्या मेरे साथ क्या क्या हुआ 

खामोशियाँ एक साज़ है, तुम धुन कोई लाओ ज़रा 
खामोशियाँ अलफ़ाज़ हैं , कभी आ गुनगुना ले ज़रा 
बेक़रार हैं, बात करने को - कह दो इनको ज़रा - 
खामोशियाँ - तेरी मेरी खामोशियाँ 
खामोशियाँ - लिपटी हुई खामोशियाँ 

नदिया का पानी भी खामोश बहता यहां 
खिली चांदनी में छिपी लाख खामोशियाँ 
बारिश की बूंदों की होती कहाँ है जुबां 
सुलगते दिलों में है खामोश उठता धुंआ 

खामोशियाँ आकाश है, तुम उड़ने तो आओ ज़रा 
खामोशियाँ एहसास है, तुम्हें मेहसूस होती है क्या 
बेक़रार हैं, बात करने को - कह दो इनको ज़रा - 
खामोशियाँ - तेरी मेरी खामोशियाँ 
खामोशियाँ - लिपटी हुई खामोशियाँ 

- रश्मि सिंघ 
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